कौन है हमारे आसपास ।
मसलन, यह चित्र एक कबूतर के चूज़े का है जो हमारे पुणे के फ्लैट की बालकनी में गुनगुनी धूप के मज़े ले रहा है । यह कबूतर एक वयस्क है या चूज़ा, आप इसके पंखों के रंग, चोंच की कोमलता और पंजों के रंग से बता सकते हैं । चूज़े के पंखों का रंग हल्का होता है वयस्क कबूतर से, चोंच और पंजे भी कोमल गुलाबी रंग के होते हैं । वयस्क कुछ इस तरह दिखते हैं।
यहां मैं अपना या हमारा फ्लैट लिख रहा हूँ पर क्या यह सचमुच हमारा है? शायद बहुमंजिला इमारत बनने से पहले यह एक पथरीला पहाड़ या जंगल हुआ करता होगा, जहां इस चूज़े के लड़फड़ दादा रहा करते होंगे और घंटों गुनगुनी धूप में, पंखों को फुलाए ठंडी सुबह और दोपहर का मज़ा लेते रहे होंगे ।
यह समझना जरूरी है कि घुसपैठिया आखिर कौन है, कबूतर या हम। मैं यह नहीं कह रहा कि हमें घर छोड़कर जंगलों का रुख कर लेना चाहिए और यह परिवेश जैसा था वैसा ही रहना चाहिए, वैसे भी इंसान अब जंगलों में रहने लायक नहीं रह गए हैं, पर कम से कम हम अपने आसपास रहने वाले सचेतन प्राणियों का ख्याल रख सकते हैं। शायद यही वह धरोहर है जो हम आने वाली पीढ़ियों को दे सकते हैं, वरना वह दिन दूर नहीं जब कबूतरों को देखने के लिए भी चिड़ियाघर जाना पड़ेगा ।
ब्लॉग का शीर्षक भी सचेतन इसलिये रखा गया है क्योंकि यह समझना ज़रूरी है कि सृष्टि के हर जीव में एक ही चेतना है और हर सचेतन जीव का धरती पर समान अधिकार है ।
संकल्प बक्षी


बहुत सुंदर। कैमरे और कलम का बढ़िया समन्वय। अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा। स्वागत और शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया पापा, आपका प्यार और प्रोत्साहन मिलता रहे ।
हटाएंशुक्रिया आपको संकल्प। प्रकृति से जुड़ाव बचपन से ही रहा है । पर आपसे मिलने के बाद इन सब दोस्तों से घनिष्टता और भी बड़ गई है।इसी तरह लिखते रहिए ।शुभकामनाएँ ।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आपका, ज़र्रा नवाज़ी ।
हटाएंबहुत बहुत स्वागत ! निरंतरता बनायें रखिये लेखन में,संकल्पजी.
जवाब देंहटाएंशुक्रिया चाचा, निरंतर प्रयास करूंगा कि इस ब्लॉग पर विचार लिखता रहूँ ।
हटाएंYour blog reminds me of great Salim ali . Wish you best of imagination and love of our environment .
जवाब देंहटाएंCongratulations for this nice write - up .
Thanks a lot Dear reader for the kind words of motivation.
हटाएंयह समझना जरूरी है कि घुसपैठिया आखिर कौन है?
जवाब देंहटाएंhum hain :(
सही कहा दोस्त, हम रोटी, कपड़ा और मकान में उलझते हुए बहुत कुछ गलत भी कर रहे हैं, ज़रूरत है छोटे बड़े सभी का ख्याल रखने की ।
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