शेरनी फ़िल्म पर टिप्पणी

 शेरनी फ़िल्म पर टिप्पणी


शेरनी, कहानी है दो शेरनियों की जो एक जंगल में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही हैं। पहली शेरनी है आदमखोर बाघिन टी-12 और दूसरी है वन अधिकारी विद्या विंसेंट (विद्या बालन)।


फ़िल्म की शुरुआत में यह स्पष्ट किया गया है कि यह असल घटनाओं पर आधारित नहीं है पर जैसे जैसे कहनी आगे बढ़ती है, यह स्पष्ट हो जाता है कि यह फ़िल्म 2018 में महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में मारी गई आदमखोर बाघिन अवनी या टी-1 से प्रेरित है।


यवतमाल के आसपास के गाँवों, विशेषकर लोनी गांव में इस बाघिन ने तथाकथित 13 लोगों को अपना निशाना बनाया। वन विभाग ने 200 लोगों की टीम बनाक



र विभिन्न तरीकों जैसे कैमरा ट्रैप्स, ड्रोन सर्वेक्षण आदि से अवनी को ज़िंदा पकड़ने की कोशिश की। तक़रीबन दो साल तक चले इस घटनाक्रम के बाद संदेहात्मक परिस्थितियों में एक प्रसिद्ध शिकारी ने अवनी को मार गिराया था। अपने दस महीने के दो शावकों के साथ साथ अवनी कितने ही प्रश्न उठा कर चली गई जैसे वन्यजीव संरक्षण की वास्तविक स्थिति, वन्यजीव और मनुष्यों के टकराव, वन विभाग में भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप आदि । यह फ़िल्म इन प्रश्नों पर पैनी नज़र डालती है ।


न्यूटन फ़िल्म के निर्देशक अमित मासूरकर की यह दूसरी फिल्म है और फ़िल्म के हर दृश्य में उनकी अलग छाप दिखती है। फ़िल्म के सारे पात्र विशेषकर गाँव वासी और वन विभाग अधिकारी बिल्कुल वास्तविक किरदारों से जुड़े लगते हैं। फ़िल्म ने वन विभाग और वन संरक्षण के कई पहलुओं को छुआ है जैसे वन विभाग की वृक्षारोपण की मुहीम के कारण गाँव के आसपास के चरागाहों का हनन, वन संरक्षण में गैर सरकारी संरक्षण संस्थाओं और विशेषज्ञों की भूमिका, वन विभाग में राजनीतिक हस्तक्षेप और बाघिन के घटनाक्रम का राजनीतिकरण, वन्यजीव संरक्षण में वनमित्रों की भूमिका आदि। 


फ़िल्म की दूसरी शेरनी (विद्या) हैं जो कि एक वन अधिकारी हैं। फ़िल्म में एक सशक्त और ईमानदार अधिकारी की जद्दोजहद तो है ही, साथ ही एक महिला पर पितृसत्तात्मक समाज के दबाव की झलक भी मिलती है। विद्या बालन का अभिनय हर बार की तरह बेजोड़ है ।


फ़िल्म के अंत में विद्या संग्रहालय में प्रदर्शित बाघिन के पुतले को देखकर ठिठक जाती हैं, इस दृश्य से दोनों शेरनियों की सजीव से निर्जीव तक की यात्रा दिलोदिमाग को कोलाहल से भर देती है। 


शेरनी एक वैचारिक फ़िल्म है जिसकी खूबसूरती इसके ठहराव और हर दृश्य में छुपे सामाजिक संदेशों से है। यह फ़िल्म वन्यजीव और मानव टकराव पर बनी गिनी चुनी फिल्मों में से एक है। इसे ज़रूर देखा जाना चाहिए। यह फ़िल्म अमेज़न प्राइम पर देखी जा सकती है।


संकल्प बक्षी


चित्र सौजन्य : गूगल






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