वी.आई.पी के दर्शन ।

आप किसी रोज़मर्रा के काम से कहीं गए और सामने से आपके पसंदीदा अभिनेता या अभिनेत्री, या कोई विशिष्ट व्यक्ति जिनसे सशरीर मिलना नामुमकिन सा लगता हो आ जाएं, आप सकपका कर उनकी ओर एकटक देखें और वे आपको तस्वीर खींचने दें बेधड़क, शायद एक आध सेल्फी भी मिल जाए - ऐसे दिन दुर्लभ होते हैं ।

गत रविवार की सुबह ऐसे ही एक अतिविशिष्ट और खूबसूरत व्यक्ति ने हमे दर्शन दिए । हम चाय की चुस्कियों में तल्लीन थे तभी एकता की नज़र, ड्राइंग रूम के बाहर फैले जंगली बादाम के पेड़ पर पड़ी, और हमने देखा की खिड़की से सबसे नजदीक टहनी पर एक वयस्क सिकंदर या पहाड़ी तोता जंगली बादाम के फल खाने में मशगूल था । यह तोता एक मादा थी और सच मानिए इसका दर्शन देना किसी वी.आई.पी. के दर्शन से कम नहीं । माफ कीजियेगा यहां मै एक तोते को व्यक्ति कह रहा हूँ, पर सचेतन का अर्थ यही है - यह समझना कि हर जीव में समान चेतना है ।

बहरहाल, हम खुशकिस्मत रहे कि इस दुर्लभ प्रजाती के तोते से रूबरू हो पाए । यह तोता, भारत में आम तौर पर देखे जाने वाले हरीमन तोते से आकार में बड़ा होता है, वयस्क तोते की लंबाई सर से पूंछ तक 22 से 24 इंच तक हो सकती है और औसत वज़न 200 से 300 ग्राम तक होता है । वज़नदार होने के अतिरिक्त, इस नायाब पंछी के हरे परों के साथ कंधे पर लाल निशान और लाल चोंच की किनारों पर पीलेपन से आप समझ सकते हैं की यह एक सिकंदर तोता है।नर तोते के गले पर लाल पट्टी या कंठी और गालों पर दाड़ीनुमा काली पट्टी होती है, इन चिन्हों के आधार पर हमारी अतिविशिष्ट अतिथी एक मादा थी (तस्वीरें संलग्न हैं)।

विकिपीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्रजाती अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (I.U.C.N.) की सूची में निकट संकटग्रस्त श्रेणी में आती है । इस संस्थान और इनके द्वारा जारी की गई सूची के बारे में विस्तार से पढ़ने और आप सभी के साथ साझा करने का मन है आने वाली पोस्ट में ।

कहा जाता है की, विश्व-विजेता और ईरान (पर्शिया) के राजा सिकंदर,जिन्हें सिकंदर महान के नाम से भी जाना जाता है, 326 ईसा पूर्व में पंजाब में अपने प्रवास के दौरान इस तोते के रूप, मधुर स्वर और चपलता से मोहित होकर इसे अपने साथ ईरान ले गए थे। इसके बाद ही इस प्रजाती के तोते भारत के साथ ही अन्य मध्य एशियाई और यूरोपीय देशों के राजाओं, धनाढ्यों और शौकीन व्यक्तियों के कुनबों की शोभा बढ़ाने लगे ।

इस तोते का रूप और स्वर ही इसके निकट संकटग्रस्त होने का कारण है, आज भी भारत और अन्य देशों के बाज़ारों में यह तोता खुलेआम बिक रहा है । भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम,1972 के अंतर्गत इस प्रजाती के तोते की खरीद-फरोख्त करना और पालतू बनाकर रखना कानूनन अपराध है । यह एक विडंबना है कि आज भी बाज़ारों में खुलेआम यह तोता बिकता दिखाई देता है । दूसरों पर स्वामित्व पाने का भाव और ऐसे नायाब पंछी को निकट से देख-सुन पाने का लालच ही इस बाजार की जड़ है, यदि हम पंछियों को खरीदना  बंद कर दें तो उनका बिकना स्वतः ही बंद हो जाएगा ।

सिर्फ सिकंदर तोता ही नहीं, किसी भी परिंदे को अपने खरीदे पिंजरे में कैद करने से पहले ज़रा सोचें कि क्या आपके दिए गए वातावरण में वो प्राकृतिक रूप में रह सकता है, पोस्ट में संलग्न चित्रों को देखें, क्या आप अपने पालतू पक्षी को इस तरह अलमस्त और स्वस्थ देख पाएंगे । यदि इसका जवाब हां है तो आप परमात्मा का दूसरा रूप हैं और आपका जन्म, गोडावण पक्षी के पुनर्जन्म की तरह दुर्लभ है ।

 इस सुंदर, चंचल और जीवन से भरपूर परिंदे के दर्शन मात्र ने हमारे जीवन में चार चांद लगा दिए, यदि आप सचेतन हैं तो प्रण लीजिये की इसी तरह प्राकृतिक रूप में ही इन परिंदों से रूबरू होंगे और इन्हे पालतू बनाने का खयाल दिल से निकाल देंगे क्योंकि पिंजरे में वे उतने ही निर्जीव और जड़ हैं जितने आप होंगे, इन मासूमों का मोलभाव करते समय ।

पोस्ट में संलग्न वीडियो देखेंगे तो आप महसूस करेंगे की महानगरों के ईंट-पत्थरों के जंगल और इनमे दौड़ते, पट्रोल पीते,शोर मचाते आधुनिकतम वाहनों से भरे परिवेश में यह दो प्राचीन प्रजातियां : जंगली बादाम का पेड़ और सिकंदर तोता ही जीवन का आभास करा रहे हैं, इसलिए खूब वृक्ष लगाएं, गमलों में पौधे लगाएँ, घर के आंगन या बालकॉनी में पानी का पात्र रखें - जल्दी ही आपको जीवन का संचार होता दिखाई देगा ।

संकल्प बक्षी


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