अचेतन से सचेतन
अप्रैल : कोयल की कूक वाली ठंडी-गर्म सुबहों का महीना, तरबूज़ - ख़रबूज़, कैरी के पन्ने का महीना , झुलसते मौसम में बेहाल होने पर भी निरंतर चलते जीवन का महीना और मेरे जन्मदिन का महीना ।
अचेतन से सचेतन की ओर प्रयासरत इस सफर में आज, एकता की भेंट इस चित्र ने एक नया आयाम अंकित कर दिया है ।
शहरी "सभ्यता" और प्राकृतिक ग्रामीण जीवन को जोड़ने वाली लड़ियाँ हैं हमारे पेड़ पौधे, उन पर विचरते विहंगम दृश्य रचते अनेक पक्षी और कितने ही जीव जंतू । इस सुंदर चित्र की परिकल्पना एकता और उनकी मित्र एवं प्रतिभाशाली चित्रकार पल्लवी पाध्ये ने की एवं ग्लॉस पर सुंदर अंकन पल्लवीजी द्वारा किया गया है।इसमें आप वारली और आधुनिक चित्रकला शैलियों का सामगम देख सकते हैं । इस सुंदर कृति को पाकर मैं अभिभूत हूँ। इन दोनों तेजस्वी कलाकारों को मेरा अनेक धन्यवाद और प्रणाम ।
पुणे और भारत के अन्य महानगरों में रहने वाले मेरे जैसे और कई रहवासी आज विटामिन ग्रीन की कमी से ग्रसित हैं। बढ़ती आबादी के साथ ज़रूरत है की रिहाइशी इलाके और पहाड़, तालाबों और जंगलों के बीच एक साझेदारी सी हो, जंगल के रहवासी - पशू पक्षी एवं आदिवासियों को न छेड़ा जाए बल्कि बसे हुए शहरों में भी ग्रीन पॉकेट्स बनाए जाएं । कहने को बहुत सी बातें हैं पर अब समय कथनी का नहीं, करनी का है - अचेतन से सचेतन की ओर जाने का है । आप खुद यह तय करें कि आप कहाँ रहना चाहते हैं, आपके लिए स्वच्छ वायु, हरीतिमा और स्वच्छ वातावरण क्या मायने रखता है । मेरी नज़र में स्वच्छता का अर्थ है , धार्मिक और जातिवादी उन्मादों से मुक्ति, इंसान को इंसान की तरह परखने की समझ और आज़ादी और हर जीवन का समान आकलन - मनुष्य हो या कोई अन्य जीव। इसके अतिरिक्त सब अतिरेक है, फसाद है , मस्तिष्क की कलुषता है । यह चित्र बहुत कुछ कह रहा है । क्या आप देख और समझ पा रहे हैं। सभ्यता और संस्कृति कहाँ बस रही है । अचेतन कौन हैं और सचेतन कहाँ विचर रहे हैं । खुद से सवाल करें, जवाब ज़रूर मिलेंगे । अब अगली पोस्ट तक मुझे आज्ञा दें । स्वस्थ रहें, सचेतन रहें ।
संकल्प बक्षी ।
अचेतन से सचेतन की ओर प्रयासरत इस सफर में आज, एकता की भेंट इस चित्र ने एक नया आयाम अंकित कर दिया है ।
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| चित्रकार: पल्लवी पाध्ये |
शहरी "सभ्यता" और प्राकृतिक ग्रामीण जीवन को जोड़ने वाली लड़ियाँ हैं हमारे पेड़ पौधे, उन पर विचरते विहंगम दृश्य रचते अनेक पक्षी और कितने ही जीव जंतू । इस सुंदर चित्र की परिकल्पना एकता और उनकी मित्र एवं प्रतिभाशाली चित्रकार पल्लवी पाध्ये ने की एवं ग्लॉस पर सुंदर अंकन पल्लवीजी द्वारा किया गया है।इसमें आप वारली और आधुनिक चित्रकला शैलियों का सामगम देख सकते हैं । इस सुंदर कृति को पाकर मैं अभिभूत हूँ। इन दोनों तेजस्वी कलाकारों को मेरा अनेक धन्यवाद और प्रणाम ।
पुणे और भारत के अन्य महानगरों में रहने वाले मेरे जैसे और कई रहवासी आज विटामिन ग्रीन की कमी से ग्रसित हैं। बढ़ती आबादी के साथ ज़रूरत है की रिहाइशी इलाके और पहाड़, तालाबों और जंगलों के बीच एक साझेदारी सी हो, जंगल के रहवासी - पशू पक्षी एवं आदिवासियों को न छेड़ा जाए बल्कि बसे हुए शहरों में भी ग्रीन पॉकेट्स बनाए जाएं । कहने को बहुत सी बातें हैं पर अब समय कथनी का नहीं, करनी का है - अचेतन से सचेतन की ओर जाने का है । आप खुद यह तय करें कि आप कहाँ रहना चाहते हैं, आपके लिए स्वच्छ वायु, हरीतिमा और स्वच्छ वातावरण क्या मायने रखता है । मेरी नज़र में स्वच्छता का अर्थ है , धार्मिक और जातिवादी उन्मादों से मुक्ति, इंसान को इंसान की तरह परखने की समझ और आज़ादी और हर जीवन का समान आकलन - मनुष्य हो या कोई अन्य जीव। इसके अतिरिक्त सब अतिरेक है, फसाद है , मस्तिष्क की कलुषता है । यह चित्र बहुत कुछ कह रहा है । क्या आप देख और समझ पा रहे हैं। सभ्यता और संस्कृति कहाँ बस रही है । अचेतन कौन हैं और सचेतन कहाँ विचर रहे हैं । खुद से सवाल करें, जवाब ज़रूर मिलेंगे । अब अगली पोस्ट तक मुझे आज्ञा दें । स्वस्थ रहें, सचेतन रहें ।
संकल्प बक्षी ।


बहुत सुंदर....बहुत रचनात्मक जन्मदिन मनाया आपने Sankalp। सदा खुश रहें....अपने मन का करते रहें...सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों..अनेक शुभकामनाएं।💐🎂
जवाब देंहटाएंसचेतन बने और हमेशा बने रहे हम सब, आज के दौर में सचेतन होना बेहद आवश्यक है शायद इस से ही सारे मुद्दे, मसले सुलझ पाएंगे ।बहुत बधाई आपको 💐
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