फूलों के परम मित्रों की कहानी

कुछ वर्षों से मौसम के उतार - चढ़ाव का असर कुछ ज़्यादा ही दिख रहा है । मसलन, इस साल अतिवृष्टी देखने को मिल रही है । अत्यधिक बारिश से जनजीवन त्रस्त है, यकीन मानिए यह बस एक चेतावनी है आने वाले विध्वंस की जिसके ज़िम्मेदार हम खुद हैं - जलवायु परिवर्तन के कारण हम सब जानते हैं । मौसम के बदलते मिज़ाज़ और प्राकृतिक आपदाओं का असर पशु - पक्षियों और पेड़ - पौधों पर हम इंसानों से ज़्यादा होता है क्योंकि वे अब भी अपने प्राकृतिक रूप में रहते हैं, मुझे लगता है इस तरह रह पाना एक वरदान है जिससे मानव वंचित हैं ।

प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़,भूसंखलन, सूखा आदि पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं और इन पर सीधे आश्रित पक्षियों, छोटे स्तनपाइयों, सरीसृपों, चीटियों, कीट - पतंगों का जीवन दूभर हो जाता है। कुछ जीव अपने पोषण का 90% से अधिक भाग फूलों से प्राप्त करते हैं, जिनमें पराग संकलित करने वाले कीट - पतंगे जैसे भँवरे, मधुमक्खियां और पक्षी जैसे हमिंग बर्ड और सूर्य पक्षी प्रमुख हैं ।

आज हम इन पक्षियों के बारे में थोड़ा विस्तार से जानेंगे।
पक्षीमित्रों और वैज्ञानिकों को छोड़ दें, तो एक आम इंसान के लिए हमिंगबर्ड और सनबर्ड काफी कुछ एक जैसे ही दिखते हैं - छोटा आकार, लंबी और मुड़ी हुई- पराग संचयन के लिए उपयुक्त चोंच और फूलों जैसे ही चमकीले, रंग बिरंगे पंख। 

हमिंगबर्ड या गुंजन पक्षी के पंखों की फड़फड़ाहट इतनी तेज होती है कि इनसे गुंजन (हमिंग) जैसी ध्वनि निकलती है - इन पक्षियों को प्रतिसेकण्ड सबसे ज़्यादा तेज़ पंख फड़फड़ाने वाले पक्षी की ख्याति प्राप्त है । यह प्रायः अमरीकी महाद्वीपों में मिलते हैं । गुंजन पक्षी - तोरचिलिडे परिवार के पक्षी हैं ।

इनसे भिन्न सनबर्ड या सूर्यपक्षी नेक्टरीनिदे परिवार के सदस्य हैं और इनकी उत्पत्ती और निवास - अफ्रीका से शरू होकर एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक है ।इस परिवार में सूर्यपक्षी के साथ स्पाईडरहंटर पक्षी भी शामिल हैं, नाम के उपयुक्त इनका भोजन मकड़ियां हैं । सनबर्ड और हमिंगबर्ड में एक और मूल भिन्नता है, वह है पराग संचयन की विधि - गुंजन पक्षी हवा में फड़फड़ाते हुए भी फूलों से पराग संचयन कर पाते हैं जबकि सूर्य पक्षी फूलों की टहनी पर बैठ कर ही पराग ले पाते हैं ।

सनबर्ड पक्षियों में नर पक्षी ज़्यादा चटकीले रंगों के होते हैं और इनकी पूंछ भी ज़्यादा लंबी होती है । नर और मादा को पहचानने का यह आसान तरीका है । पर ध्यान रहे यह पक्षी बहुत छोटे होते हैं (5 ग्राम से लेकर 45 ग्राम) और बहुत तेज़ उड़ते हैं, अगर आप ध्यान से इन्हें देखना चाहते हैं तो अपने आंगन या बालकनी में फूलवाले पौधे लगाएं और शायद आपकी किस्मत चमक जाए और ये आपके नजदीक आ जाएं । जैसा आप चित्र में देख सकते हैं, इनकी चोंच मुड़ी हुई होती है और ज़ुबान ट्यूबनुमा होती है जिससे पराग संचयन में आसानी होती है ।

सनबर्ड (स्त्रोत: एकता)


सनबर्ड एक ही जीवनसाथी के साथ पूरा जीवन व्यतीत करते हैं और मादा एक बार में चार तक अंडे देती है । इनके घोंसले छोटे बटुए या कप के आकार के होते हैं ।मादा पक्षी ही अंडों को सेती है और नर एवं मादा दोनो नवजातों की देखभाल करते हैं ।हमिंगबर्ड पक्षियों में भी नर और मादा में काफी अंतर होता है, रंग और चोंच की लंबाई में । कई प्रजातियों में मादा ज़्यादा चटकीले रंगों से सुशोभित और नर से लंबी चोंच वाली होती है, एक बार में ये दो तक अंडे दे सकती है ।

हमिंग बर्ड (स्त्रोत: गूगल)


अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर रहने वाले सनबर्ड और हमिंगबर्ड, दोनो ही रात में अपने शरीर का तापमान कम कर सुस्ती या अकर्मण्यता की स्थिती (torpor) में चले जाते हैं, इससे इन्हें ऊर्जा बचने में मदद मिलती है ।

यदि आप भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया या अफ्रीका के किसी बगीचे या जंगल में फूलों पर मंडराते चटकीले या मद्धम रंग के छोटे पक्षी देखें तो वे सनबर्ड या सूर्य पक्षी होंगे और अमरीका में वे हमिंग बर्ड या गुंजन पक्षी होंगे । यह कनवर्जेंट एवोल्यूशन या संसृत विकास की देन है - की अलग-अलग महाद्वीपों पर एक दूसरे से बिल्कुल अलग उपजी इन दोनों प्रजातियों में इतनी समानताएं हैं, इसका मुख्य कारण है समान आहार जो की है - फूलों का पराग।

सनबर्ड


इन पक्षियों के लिए फूलों की महत्ता हम मनुष्यों से कहीं ज़्यादा है, यह एक स्वाभाविक बात है । लगातार होती मूसलाधार बारिश के दिनों में भी इन पक्षियों को फूलों पर मंडराते हुए देखे जा सकते हैं - यदि फूलों का पराग नहीं तो इन पक्षियों का जीवन भी नहीं । साथ ही साथ, ये पक्षी फूल वाले पेड़ - पौधों के परागन (pollination) में महत्वपूर्ण योगदान निभाते हैं । जिस तरह इनका जीवन फूलों पर आश्रित है, उसी तरह फूलों का विकास भी इन पर निर्भर करता है ।

बहरहाल, जब आप अपने आंगन में लगे फूलों को तोडें तो, पहले इन रंग बिरंगे नन्हे दोस्तों के बारे में ज़रूर सोचें, आप किसी का भोजन छीनने का जघन्य अपराध तो नही कर रहे हैं । श्रृंगार या श्रद्धांजलि के लिए तोड़े गए फूल यदि लगे रहने दिए जाएं तो न सिर्फ पक्षियों, भंवरों और मधुमक्खियों को उनका भोजन उपलब्ध होता रहेगा पर साथ ही आपकी बगिया एक सम्पूर्ण पारिस्थिकी तंत्र (इकोसिस्टम) बनी रहेगी जो की बहुत ज़रूरी है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपकी बगिया में और फूल आएंगे या नहीं । इसलिए अपनी बगिया में ही नही, सार्वजनिक बागीचों में, सड़क के किनारे लगी क्यारियों में, जंगलों में , फूलों को खिलने दें - स्वार्थी नहीं सचेतन रहें ।

सनबर्ड

टिप्पणियाँ

  1. बधाई ��बहुत ज़रूरी मुद्दा उठाया आपने ।अक्सर देखने को मिलता हैं कि सुबह फूलों से लदा पेड़ दोपहर होते होते पूरी तरह खाली हो जाता हैं। कई लोग सुबह होते ही पूजा अर्चना के लिए फूलों को तोड़ लेते हैं, उन्हें शायद यह ज्ञात ही नही होता कि इन फूलों पर उनसे पहले हक़ इन मासूम पंछियों का है जिनका भोजन, जीवन ही इन फूलों से हैं।

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