पुस्तक: "बर्ड्स ऑफ इंदौर" पर पाठकीय समझ
आज मेरे ब्लॉग सचेतन में पढ़ें ।
पुस्तक: "बर्ड्स ऑफ इंदौर" पर पाठकीय समझ ।
"द नेचर वोलेंटियर्स" के आजीवन सदस्य श्री विजय रांगनेकर सर का आत्मीय आभार, उनकी भेंट यह पुस्तक "बर्ड्स ऑफ इंदौर" किसी भी पर्यावरण प्रेमी और पक्षीमित्र के लिए अनमोल धरोहर है, और मेरे जैसे नौसिखिये पक्षी प्रेमी के लिए तो ज्ञान का अगाध भंडार है ।
इस किताब के रचयिता हैं विख्यात पर्यावरणविद पदम श्री भालू मोंडे, एवं उनके साथी श्री अजय गाडीकर और श्री प्रवर मौर्य । यह संयोग ही था की सामाजिक सेवा प्रकोष्ठ द्वारा तंग बस्ती के बच्चों के लिए आयोजित व्यक्तित्व विकास शिविर में शामिल होने विजय सर , पापा (श्री ब्रजेश क़ानूनगो) को साथ लेने आ रहे थे और पापा ने पक्षियों में मेरी रुचि के बारे में उन्हें बताया । घर पहुंचते ही उन्होंने यह पुस्तक मुझे भेंट की। अब तक गूगल, विकिपीडिया, पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन दस्तावेजों से ही पक्षियों के बारे में जानने, समझने की मशक्कत के बाद इस किताब का मिलना एक अत्यंत सुखद अनुभव था ।
इंदौर के सिरपुर तालाब का कूड़े और गंदगी से भरे दलदल से एक महत्वपूर्ण प्राणी निग्रह(reserve) में रूपांतरण की कहानी किसी परी-कथा से कम नहीं । एक समय का उपेक्षित यह जलाशय आज रहवासी और घुमंतू पक्षियों का पसंदीदा क्षेत्र है, और यहां आने वाले पक्षियों की संख्या और विविधता हर साल बढ़ती जा रही है । यह "द नेचर वोलेंटियर्स" के संस्थापक पदम श्री
भालू मोंडे और साथियों की मेहनत और सन 1992 से चल रहे निरन्तर प्रयासों का नतीजा है कि कुछ वर्षों पहले सिरपुर तालाब, इंदौर को बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास सोसाइटी (B.N.H.S) द्वारा एक महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र (I.B.B.A) घोषित किया गया है । इस वर्गीकरण से यह क्षेत्र भारत में पक्षी संरक्षण के लिए चिन्हित किये गए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन गया है ।
"द नेचर वोलेंटियर्स" की मेहनत और व्यवहारिक ज्ञान का निचोड़ है यह पुस्तक "बर्ड्स ऑफ इंदौर" । यह एक सम्पूर्ण फील्ड गाइड है जिसे लेकर आप पक्षियों से अपनी पहचान बढ़ाने निकल सकते हैं । यह पुस्तक पक्षियों की संरचना और उनके पहचान चिन्हों की बारीकियां, रहवासी (resident) और घुमंतू (migratory) पक्षियों का वर्गीकरण और साथ ही उनकी अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (I.U.C.N.) की संरक्षण सूची की स्थिति सहज ही उपलब्ध कराती है, इसके अलावा इंदौर के महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्रों जैसे यशवंतपुर तालाब, सिरपुर तालाब, किशनपुरा तालाब, बिलावली तालाब आदि के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुस्तक में पक्षियों का वर्गीकरण बहुत ही सटीक तरीके से किया गया है,जैसे वेटलैंड पक्षी, ज़मीन पर भोजन करने वाले पक्षी, रात्रिकालीन पक्षी, हवा में भोजन करने वाले पक्षी, परभक्षी पक्षी आदि । यह वर्गीकरण पक्षियों की जानकारी जुटाने और संबद्ध करने में अत्यंत सहायक है । साथ ही ,पुस्तक में पक्षियों के सजीव चित्र हैं जो "द नेचर वोलेंटियर्स" के सदस्यों ने ही खींचे हैं और इनसे पक्षियों की पहचान करना बहुत आसान हो जाता है । पक्षियों की विविधता और संकलन इतना समृद्ध है कि यह पुस्तक इंदौर ही नहीं यहां पुणे और अन्य शहरों में भी उतनी ही उपयोगी है ।
यह पुस्तक सभी पक्षी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है, विजय सर और पापा (श्री ब्रजेश क़ानूनगो) का पुनः धन्यवाद जिनके सहयोग से यह पुस्तक मुझे मिली ।
पुस्तक: "बर्ड्स ऑफ इंदौर" पर पाठकीय समझ ।
"द नेचर वोलेंटियर्स" के आजीवन सदस्य श्री विजय रांगनेकर सर का आत्मीय आभार, उनकी भेंट यह पुस्तक "बर्ड्स ऑफ इंदौर" किसी भी पर्यावरण प्रेमी और पक्षीमित्र के लिए अनमोल धरोहर है, और मेरे जैसे नौसिखिये पक्षी प्रेमी के लिए तो ज्ञान का अगाध भंडार है ।
इस किताब के रचयिता हैं विख्यात पर्यावरणविद पदम श्री भालू मोंडे, एवं उनके साथी श्री अजय गाडीकर और श्री प्रवर मौर्य । यह संयोग ही था की सामाजिक सेवा प्रकोष्ठ द्वारा तंग बस्ती के बच्चों के लिए आयोजित व्यक्तित्व विकास शिविर में शामिल होने विजय सर , पापा (श्री ब्रजेश क़ानूनगो) को साथ लेने आ रहे थे और पापा ने पक्षियों में मेरी रुचि के बारे में उन्हें बताया । घर पहुंचते ही उन्होंने यह पुस्तक मुझे भेंट की। अब तक गूगल, विकिपीडिया, पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन दस्तावेजों से ही पक्षियों के बारे में जानने, समझने की मशक्कत के बाद इस किताब का मिलना एक अत्यंत सुखद अनुभव था ।
इंदौर के सिरपुर तालाब का कूड़े और गंदगी से भरे दलदल से एक महत्वपूर्ण प्राणी निग्रह(reserve) में रूपांतरण की कहानी किसी परी-कथा से कम नहीं । एक समय का उपेक्षित यह जलाशय आज रहवासी और घुमंतू पक्षियों का पसंदीदा क्षेत्र है, और यहां आने वाले पक्षियों की संख्या और विविधता हर साल बढ़ती जा रही है । यह "द नेचर वोलेंटियर्स" के संस्थापक पदम श्री
भालू मोंडे और साथियों की मेहनत और सन 1992 से चल रहे निरन्तर प्रयासों का नतीजा है कि कुछ वर्षों पहले सिरपुर तालाब, इंदौर को बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास सोसाइटी (B.N.H.S) द्वारा एक महत्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र (I.B.B.A) घोषित किया गया है । इस वर्गीकरण से यह क्षेत्र भारत में पक्षी संरक्षण के लिए चिन्हित किये गए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बन गया है ।
"द नेचर वोलेंटियर्स" की मेहनत और व्यवहारिक ज्ञान का निचोड़ है यह पुस्तक "बर्ड्स ऑफ इंदौर" । यह एक सम्पूर्ण फील्ड गाइड है जिसे लेकर आप पक्षियों से अपनी पहचान बढ़ाने निकल सकते हैं । यह पुस्तक पक्षियों की संरचना और उनके पहचान चिन्हों की बारीकियां, रहवासी (resident) और घुमंतू (migratory) पक्षियों का वर्गीकरण और साथ ही उनकी अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (I.U.C.N.) की संरक्षण सूची की स्थिति सहज ही उपलब्ध कराती है, इसके अलावा इंदौर के महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्रों जैसे यशवंतपुर तालाब, सिरपुर तालाब, किशनपुरा तालाब, बिलावली तालाब आदि के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान करती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुस्तक में पक्षियों का वर्गीकरण बहुत ही सटीक तरीके से किया गया है,जैसे वेटलैंड पक्षी, ज़मीन पर भोजन करने वाले पक्षी, रात्रिकालीन पक्षी, हवा में भोजन करने वाले पक्षी, परभक्षी पक्षी आदि । यह वर्गीकरण पक्षियों की जानकारी जुटाने और संबद्ध करने में अत्यंत सहायक है । साथ ही ,पुस्तक में पक्षियों के सजीव चित्र हैं जो "द नेचर वोलेंटियर्स" के सदस्यों ने ही खींचे हैं और इनसे पक्षियों की पहचान करना बहुत आसान हो जाता है । पक्षियों की विविधता और संकलन इतना समृद्ध है कि यह पुस्तक इंदौर ही नहीं यहां पुणे और अन्य शहरों में भी उतनी ही उपयोगी है ।
यह पुस्तक सभी पक्षी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है, विजय सर और पापा (श्री ब्रजेश क़ानूनगो) का पुनः धन्यवाद जिनके सहयोग से यह पुस्तक मुझे मिली ।



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