सौम्या का साक्षात्कार
सौम्या का साक्षात्कार
स्वर्ग में सौम्या का आगमन हुआ ही था,की स्वर्ग जीव विज्ञान चैनल ने सौम्या के सत्कार और साक्षात्कार का आयोजन रख लिया । सौम्या कौन? अरे आप सौम्या को नहीं पहचान पा रहे - वही गर्भवती हथिनी जो कुछ दिनों पहले केरल में मृत्यु को प्राप्त हुई थी । पढ़िये साक्षात्कार के कुछ अंश, साक्षात्कार ले रही हैं टी-1 /अरे आप टी-1 को भी नहीं पहचान रहे - बड़ी कमज़ोर है आपकी याददाश्त । टी-1 या अवनी वही आदमखोर बाघिन है जिसे महाराष्ट्र में मार दिया गया था गत वर्ष जब वह अपने दो नन्हे शावकों की रक्षा कर रही थी, अब वह स्वर्ग जीव विज्ञान चैनल की वरिष्ठ रिपोर्टर है ।
स्वर्ग में सौम्या का आगमन हुआ ही था,की स्वर्ग जीव विज्ञान चैनल ने सौम्या के सत्कार और साक्षात्कार का आयोजन रख लिया । सौम्या कौन? अरे आप सौम्या को नहीं पहचान पा रहे - वही गर्भवती हथिनी जो कुछ दिनों पहले केरल में मृत्यु को प्राप्त हुई थी । पढ़िये साक्षात्कार के कुछ अंश, साक्षात्कार ले रही हैं टी-1 /अरे आप टी-1 को भी नहीं पहचान रहे - बड़ी कमज़ोर है आपकी याददाश्त । टी-1 या अवनी वही आदमखोर बाघिन है जिसे महाराष्ट्र में मार दिया गया था गत वर्ष जब वह अपने दो नन्हे शावकों की रक्षा कर रही थी, अब वह स्वर्ग जीव विज्ञान चैनल की वरिष्ठ रिपोर्टर है ।
अवनी: आपका बहुत स्वागत है इस साक्षात्कार में , आशा है स्वर्ग में आपको कोई तकलीफ नहीं पेश आ रही होगी।
सौम्या: आपका बहुत धन्यवाद, मुझे यहां बहुत अच्छा लग रहा है। खाने, पीने, रहने और घूमने का बहुत अच्छा प्रबंध है, बस अपने झुंड और साथी की कमी महसूस हो रही है । काश वे सब भी यहां होते।
अवनी: अरे आप चिंता न करें, वे भी आ ही जाएंगे देर सबेर । वैसे कर्नाटक के शिवमोगा की सकरबैलू छावनी में मरने वाले सारे हाथी यहां हैं, ओडिशा और बंगाल में रेल से कटकर मरने वाले भी यहीं हैं - मैं कल ही आपको सबसे मिलवाती हूँ।
सौम्या: आपका आभार,वैसे मैं उत्सुक हूँ जानने के लिए की धरती पर अभी क्या हो रहा है- क्या मेरी मृत्यु से मेरे साथियों और बाकी जंगली जानवरों का भला होगा?
अवनी (हंसते हुए): आप बहुत भोली हैं, मनुष्यों की स्मरण शक्ति बहुत क्षीण है । आपके झुंड के साथी काफी दुखी हैं और कुछ मनुष्य भी, मनुष्यों ने हर तरफ आपकी तस्वीरें लगा रखी हैं और दुख प्रकट कर रहे हैं । कुछ तो अपने ही केरल के साथी मनुष्यों को दोषी ठहरा रहे हैं, कह रहे हैं कि वे लोग ही खराब हैं , जानवरों से क्रूरतापूर्ण व्यवहार रखते हैं।
सौम्या: यह मनुष्य प्रजाति मेरी समझ के बाहर है । इन्हें कब समझ आएगा कि यह किसी समाज, प्रदेश, धर्म या समुदाय की बात नही है और यह किसी चिन्हित पशु पक्षी की बात भी नहीं है । मैं तो पहले भी इंसानी इलाकों में गई थी पर इस बार किस्मत खराब थी।
अवनी: आप बिलकुल ठीक कह रही हैं,अगर इंसानी प्रदेश या समुदाय की बात करें - पिछले साल उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक बाघिन को लाठियों से पीट-पीट कर मार दिया गया था, दुधवा-पीलीभीत के जंगलों में ऐसी घटनाएं आम हैं, असम के गोलाघाट में अभी दो-तीन महीने पहले एक तेंदुए को मारकर खा गए थे मनुष्य, शेरों की तो बात ही न करें - 2018-20 दो सालों में गुजरात में 261 शेर मारे गए हैं । अब किस-किस का उल्लेख करें, भारत और विश्व के हर कोने और समुदाय के लोगों द्वारा हमारे जैसे कई जीव मारे जा रहे हैं पर मनुष्य तो जैसे आखों पर पट्टी बांध कर जी रहे हैं, नफरत की पट्टी ।
सौम्या: वाह, अद्भुत है आपका सामान्य ज्ञान और विश्लेषण। वैसे शायद ऐसी घटनाओं का प्रमुख कारण पशु-मानव टकराव है - ये मनुष्य खेती करते हैं, जंगलों से लकड़ियां और फल बीनते हैं, कोयला और खनिज खदानों में काम करते हैं, इनके शावक बस्तियों में घूमते हैं और काफी बढ़ती जा रही है इनकी संख्या । जहां ये अब रहते हैं, वहां कभी हमारे बाप दादा और पुरखे विचरते थे, जंगलों का कटाव होने से हमारा क्षेत्र सीमित हो गया है।अब अगर हम गलती से वहां पहुंच जाएं तो टकराव होना स्वाभाविक है, हम जीव भी उनकी काफी हानि कर देते हैं वैसे, मनुष्य और दूसरे जीव जब दोनों डरे हुए होते हैं तब ऐसी दुर्घटनाएं हो जाती हैं ।
अवनी: सहमत हूं आपसे पर एक बात और भी है। यह टकराव संसाधनों का तो है ही, मानसिकता का भी है । एक उदाहरण देखिए- शहर के घरों या बागीचों में अगर कोई सर्प दिख जाए तो ये मनुष्य लाठी लेकर उसे मार देते हैं यह बिना विचारे की वह ज़हरीला है या निर्दोष । स्वर्ग में आने वाले सबसे ज़्यादा सर्प: कोबरा या अजगर नहीं - धमन या मूषक सर्प हैं- जो बेचारे बिना ज़हर के - मूषक खाने वाले मनुष्य के मित्र सर्प हैं। इनके अलावा शहरी जीव जैसे श्वान, गाय,बिल्ली आदि तो कब से इन इंसानों के साथ रहते आए हैं पर उनका शोषण कहाँ रुका है।
सौम्या: इंसानों को बचपन से ही यह बताया जाना चाहिए कि दूसरे जीवों से किस तरह पेश आना चाहिए । हम भी तो अपने बच्चों को भोजन ढूंढने से लेकर जंगल के हर तौर तरीके सिखाते हैं - यह भी की अन्य जीवों को नाहक चोट पहुंचाना गलत है । अगर इंसानों में दया और संवेदना के बीज हों तो इस तरह की घटनाएं कम हो सकती हैं और हमारे पृथ्वी पर अब भी रह रहे दोस्तों का भला हो सकता है।
अवनी: आपकी बात सोलह आने सही है, इंसान शायद आपका यह साक्षात्कार सुन या देख पाते तो इस तरह की घटना के बाद एक दूसरे से नफरत करने की जगह प्रेम, सद्भाव और दया की भावना रखते और हम सभी जीव समान अधिकार से एक दूसरे के साथ रह पाते । वैसे स्वर्ग की इंसानी बस्ती ने आपके लिए एक विशेष प्रीतिभोज का प्रबंध किया है , आप वहां जाएंगी ?
सौम्या: उन्हें मेरा यही संदेश है कि प्रीतिभोज की जगह अगर धरती के इंसानों को हमारा यह संदेश पहुंचाया जाए तो मुझे ज़्यादा खुशी होगी।
इति।।
लेखक: संकल्प ।
(तस्वीरें इंटरनेट से साभार)

बहुत अच्छा लेख । सौम्या और अवनी के बीच के संवाद कितनी गहराई और परिपक्वता लिए हुए थे ,ईमानदार कोशिशों में शायद यही ठहराव और धैर्य नज़र आना चाहिए ।
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