ततैये की छत्रछाया में
ततैये की छत्रछाया में
अगर आप गूगल पर ततैया लिख कर सर्च करें तो सबसे पहले ततैये के डंक के इलाज से जुड़े लेख, खबरें दिखती हैं। हम सभी के बचपन का कहीं कोई अंश ततैये से ज़रूर जुड़ा है जैसे उदयपुर में हमारे घर के आंगन में पीले कागज़ी ततैयों (अंग्रेज़ी में पेपर वास्प) की कालोनी थी, जब तक हम उन्हें परेशान न करें वे कुछ नहीं करते पर अगर उनके छत्ते के आसपास हमारी गेंद या कुछ और चला जाए तो हाथ में बैडमिंटन रैकेट लेकर ही जाने की हिम्मत होती थी । घर के बड़े ततैये के काटने पर तुरंत उस जगह को धोकर,लोहे की चाबी या कोई और चीज़ रगड़ देते - कुछ देर बाद सूजन और दर्द कम हो जाता, पर दहशत ज़रुर बनी रहती।
यह भी सुनने में आता था कि ततैया याद रखता है कि आपने उसे या उसके परिवार को परेशान किया है और आंधी की तरह उड़ता हुआ डंक मारकर बदला लेता है, यह किंवदंती है या सत्य इसका कोई प्रमाण नहीं मिला पर थोड़ा अध्ययन करने पर या ज़रूर समझ आया कि ततैया एक विलक्षण जीव है और इसका सामाजिक तंत्र काफी विकसित है, अपने शत्रुओं को याद रख पाना इनके लिए कोई मुश्किल बात नहीं पर शायद इन्हे बदला लेने का समय ही न मिल पाता हो ।
बचपन की वह स्मृतियां लौट आईं जब एक दिन रसोई की खिड़की में एक ततैया आ गया, एकता तुरंत ही कैमरा ले आई और बहुत सारे चित्र खींचे, मैं थोड़ा सहमा हुआ ततैये की गतिविधियां देखता रहा। सचेतन की इस पोस्ट की प्रेरणा उन्ही चित्रों से मिली और यह जिज्ञासा भी कुलबुलाई की आखिर ततैये की कहानी क्या है । जैसे आप चित्र में देख पाएंगे यह एक काले रंग का ततैया है जिसे काला और पीला मड डॉबर भी कहा जाता है, इसके शरीर और पैरों पर पीली और काली धारियां हैं, शरीर पर दो पतले पंख हैं, छह टांगे हैं और कमर काफी पतली है - ततैये और मधुमक्खी में यह मुख्य अंतर है - मधुमक्खी का शरीर अंडाकार और एक सीध में होता है, वहीँ ततैये का शरीर उसकी कमर के कारण दो भागों में बंटा हुआ सा दिखता है । ततैये और मधुमक्खी में एक और प्रमुख अंतर है इनका डंक - मधुमक्खी अपने डंक का प्रयोग अपने जीवनकाल में एक ही बार कर सकती है, डंक की शारीरिक संरचना ऐसी होती है कि उसे प्रयोग में लाने के बाद, मधुमक्खी भी जीवित नहीं रह पाती । इससे उलट ततैये कई बार दंश का प्रयोग कर सकते हैं,बिना अपनी जान गवाएं ।
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| काला और पीला मड डॉबर ततैया |
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| काला और पीला मड डॉबर ततैया |
आपको आश्चर्य होगा की मक्खी, ततैया और चींटी एक ही परिवार के सदस्य हैं, गण- हाईमेनोपेटरा और उपगण- अपॉक्रीता । मधुमक्खी एक ही बार दंश कर सकती है और ततैया कई बार - इसका मर्म इनके जीवनचक्र में छुपा है । जैसे हम जानते हैं- मधुमक्खियां फूलों और फलों से पराग संचयन करती हैं और अपने छत्ते में इस पराग से मधु बनाती हैं - छत्ते में रानी, सिपाही, कामकाजी और शिशु मधुमक्खियां रहती हैं - ज़्यादा तादाद कामकाजी मधुमक्खियों की होती है । इनके जीवन चक्र में दंश का प्रयोग केवल आत्मरक्षा के लिए होता है - यदि आप छत्ते से मधु चुराने की कोशिश करेंगे तो आप दंश रूपी दंड के भागी बनेंगे । अब ततैये या बर्रे को लें - इनकी कई प्रजातियां और उपप्रजातियाँ हैं जिनमे से कई सामाजिक हैं (जैसे मेरे बचपन के दोस्त पीले ततैये) और कई एकाकी (जैसे हमारा नया मेहमान मड डॉबर) - चाहे सामाजिक हों या एकाकी वयस्क ततैयों का भोजन भी मधुमक्खी की तरह ही फूलों और फलों से मिला पराग है परन्तु जहां शिशुओं के पोषण और लालन-पालन के तरीके की बात हो तो ये मधुमक्खी से भिन्न - कीट जगत के सबसे दुर्दांत परभक्षियों में से एक बन जाते हैं - ये अपने डंक से अपने शिकार को मूर्छित कर देते हैं, यह एक ज़ोंबी जैसी अवस्था कही जा सकती है जिसमें शिकार अपना शरीर हिलाने में अक्षम होता है, फिर ये उन्हें अपने बनाए घर में कैद कर देते हैं जहां यह अंडे देते हैं । अंडों से इनके लार्वा बाहर आते ही इस भोजनरूपी जीव को खाकर प्रोटीनयुक्त खुराक प्राप्त करते हैं और दस से पंद्रह दिन में बड़े हो वयस्क ततैये बनकर छत्ते या घर से बाहर आते हैं। इस तरह ततैयों के लिये उनका डंक भोजन जुटाने का अहम औज़ार है और इसलिए यह कई बार प्रयोग में लाया जा सकता है।
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| काला और पीला मड डॉबर ततैया |
ततैये ज़्यादातर उन कीटों का शिकार करतें हैं जो फसलों और पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं जैसे इल्ली (कैटरपिलर), कॉकरोच, मक्खियां, मकड़ियां आदि और इसलिए ये किसानों के मित्र होने के साथ साथ प्रकृति का संतुलन बनाने में भी बड़ा योगदान करते हैं, जैविक कीट नियंत्रण में ततैयों की अहम भूमिका है । सामाजिक ततैयों की बात करें तो मधुमक्खियों की तरह ही इनके भी छत्ते होते हैं जहां एक रानी जिसे अंग्रेज़ी में फॉउंडरेस भी कहा जाता है रहती है, इनका समाज पूरी तरह स्त्री प्रधान होता है - रानी के देखरेख और नियंत्रण में मादा कामकाजी ततैये अपनी लार और मिट्टी से छत्ते बनाते हैं और उसमें भोजन इकट्ठा करते हैं, छत्ते के हर कमरे में एक अंडा दिया जाता है और इसमें भोजन रख कर इसका मुंह बंद कर दिया जाता है। रानी यह नियंत्रित कर सकती है कि वह किस प्रकार के अंडे देगी, मसलन अंडों से दूसरी रानियां होंगी या कामकाजी मादाएं या नर ततैये- शायद मौसम और जीवन काल के अनुसार यह तय होता होगा - इनकी सामाजिक संरचना काफी दिलचस्प और जटिल है, भारतीय विज्ञान संस्थान (आई आई एस सी),बैंगलुरू के जीव वैज्ञानिक डॉ राघवेंद्र गाड़कर ने चालीस वर्षों तक भारतीय पीले पेपर ततैयों का अध्ययन कर उनकी सामाजिक संरचना के कई पहलुओं पर से पर्दा उठाया, उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें जर्मनी का सबसे बड़ा पुरस्कार - क्रोस ऑफ आर्डर ऑफ मेरिट मिला है (https://scroll.in/article/747169/an-indian-scientist-who-spent-40-years-studying-a-wasp-receives-germanys-highest-civilian-honour)।
उधर एकाकी ततैये जैसे हमारा मड डॉबर अकेले ही अपना घर बनाते हैं, इनका घर मिट्टी के ढेर सा दिखता है जो कि लार और मिट्टी से ही बना होता है (चित्र देखें), खाना रखने और अंडे देने के बाद इसका मुंह बंद कर दिया जाता है । कुछ ततैये घड़े के आकार का घर बनाते हैं जिन्हें कुम्हार ततैये (पॉटर वास्प) भी कहा जाता है (चित्र देखें)।ये दोनों की घर हमारी खिड़की और बालकनी में बनाए गए हैं। आप इन्हें जल स्त्रोतों जैसे पानी के नलों, हैण्डपम्पों आदि के पास मंडराता पाएंगे क्योंकि पानी इनकी लार बनाने की ज़रूरी सामग्री है।
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| मड डॉबर ततैये का छत्ता |
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| कुम्हार ततैये का छत्ता |
ततैये के बारे में और बहुत सी बातें सीखने और अध्ययन करने लायक हैं, पर एक बात निश्चित है कि ततैये के डंक के उपचार सीखने से ज़्यादा ततैये के जीवन चक्र के बारे में जानना और समझना ज़्यादा सुखद है । कभी आप अपने घर के बाहरी हिस्सों में इनके घर देखें तो खुश हों कि एक ततैया मां ने आप पर भरोसा किया है,आपके घर के अन्य कीड़े, मक्खियां और मकड़ियां अब चैन से नही रह पाएंगे और आप ततैये की छत्र-छाया में सुरक्षित रहेंगे, इसी के साथ खूब व्यस्त और अलमस्त रहें, सचेतन रहें।
संकल्प






'ततैये की छत्र छाया में ' एक बार फिर सचेतन से सुंदर ,रोचक और महत्वपूर्ण प्रस्तुति ।बहुत बधाई 💐💐
जवाब देंहटाएं'ततैये की छत्र छाया में ' एक बार फिर सचेतन से सुंदर ,रोचक और महत्वपूर्ण प्रस्तुति ।बहुत बधाई 💐💐
जवाब देंहटाएंVery nice 👌
जवाब देंहटाएंSuperb article - very informative and very absorbing at the same time. !! Thanks for sharing!
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