अगर खिलें तो बारामासी की तरह
अगर खिलें तो बारामासी की तरह
'सादा जीवन उच्च विचार', यह सरल पर बहुत ही गूढ़ वाक्य बचपन से ही माता-पिता और गुरूजनों से सुनते आए हैं पर जैसे ही वयस्क दुनिया में आए तो पता चला कि शायद यही जीवन का सार है पर इसे निभाना जीवन की ही तरह बहुत ही कठिन है । बावर्ची फ़िल्म में राजेश खन्ना कह गए हैं - "इट इस वेरी सिंपल टू बी हैप्पी बट इट इस वेरी डिफीकल्ट टू बी सिंपल", और सचमुच इंसानी जीवन में श्री रवींद्रनाथ टैगोर का यह कथन बिल्कुल ठीक बैठता है।हम इंसानों के लिये सादगी के मापदंड अलग-अलग हैं, जैसे फलां बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते हैं, अब तक इंस्टाग्राम पर एकाउंट नहीं खोला है, फ़ेसबुक पर ही लगे रहते हैं; मतलब सादगी का पैमाना सबका अपना-अपना है। इंसानी जीवन से उलट प्रकृति में ऐसे कितने ही उदाहरण हैं जो सादगी की सुंदरता और महानता से परिपूर्ण हैं ।
आज हम ऐसे ही एक नगीने की बात करेंगे जिसे हम सबने कभी न कभी सड़क के किनारे यूं ही उगते-फैलते देखा होगा, जी हां हम सदाफूली या सदाबहार या "कैथारेनथस रोसियस" या "पेरिविनकल" या "विन्का" फूलों की बात कर रहे हैं । ये इतने सादे हैं कि सड़क पर, खंडहरों में, मतलब किसी भी उजड़े चमन में खिल जाते हैं । कुछ लोग जो हर सुबह सैर के नाम पर फूल चरने निकलते हैं, वे भी इन्हें हाथ नहीं लगाते, शायद इनमें खुशबू न होना और इनकी बहुलता इन्हें बचा लेती हैं। वैसे यह इनके लिये अच्छा ही है, मधुमक्खियों, तितलियों, कीट-पतंगों और पंछियों का भोजन जो बना रहता है।
कुछ साल भर पहले हमने सदाफूली के दो पौधे ख़रीदे, जी हां मोल देकर लिये;दो एक एक डाल वाले पौधे, आज ये बड़े हो गए हैं और इन्होंने हमारी बालकोनी की साज -सज्जा का बीड़ा उठा लिया है। इनके साथ ही श्रीमान गुलाब महाराज भी आए थे पर वे कुछ ही महीनों में चल बसे, शायद मौसम की मार थी या हमारी कोताही, कह नहीं सकते । पर यह प्यारे फूल टिके रहे, हल्के गुलाबी और मैजेंटा रंगों से सराबोर। ये कई रंगों में पाए जाते हैं जैसे सफेद, पीले, जामुनी और मिश्रित रंगों में भी पर सबसे आम रंग शायद गुलाबी ही है।
इन फूलों की उत्पत्ति, अफ्रीका में स्थित मेडागास्कर द्वीप पर हुई थी- इनकी आठ प्रजातियों में से सात आज भी सिर्फ वहीं पाई जाती हैं पर आठवी प्रजाति जिसे हम सदाफूली के नाम से जानते हैं, अमरीका से ले कर एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक में पाई जाती है। इन फूलों की जीवटता ऐसी है कि ऑस्ट्रेलिया के सबसे सूखे इलाकों में भी यह बहुतायात से पाए जाते हैं, वहाँ इन्हें वीड या निरर्थक वनस्पति की उपाधि दे दी गई है। यह मानवीय सोच ही है, जो किसी भी फलती-फूलती प्रजाति को, चाहे वह कोई पशु, पक्षी, व्यक्ति, समुदाय या फिर फूल ही क्यूं न हो, निरर्थक और संक्रामक जैसे विश्लेषण दे कर उसके प्रति नफरत पैदा करती है।क्या एक पेड़ अपने ऊपर लिपटी लता को निरर्थक कहकर उससे घृणा करता होगा या फिर काले गुलाब का दुर्लभ पौधा, लाल गुड़हल को देख कर इतराता होगा?, प्रकृति में ऐसा भेदभाव नहीं है। भारतीय उपमहाद्वीप जैसे भारत, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि का वातावरण तो इन्हें इतना रास आता है कि यहां ये साल भर पुष्पों से लदे रहते हैं, इसलिये इन्हें बारहमासी या बोलचाल की भाषा में बारामासी और अंग्रेज़ी में "ऐनुअल फ्लावर" भी कहा जाता है।
इन्हें कई देशों में "फ्लावर ऑफ डेथ" भी कहा जाता था क्योंकि रोमन साम्राज्य में अपराधियों को मृत्युदंड दिए जाने से पहले इसका ताज बना कर पहनाया जाता था, बादशाह के सर पर सजता था लौरेल या तेज पत्तियों का मुकुट और अपराधियों के सर पर सदाबहार का ताज । शायद अपने सदाबहार सौंदर्य और सौम्यता से यह आखिरी क्षणों में भी उन लोगों का मनोबल बढ़ाता रहा होगा।
इनकी खूबसूरती इनकी जिजीविषा (जीने की चाह) में भी है,भीषण गर्मी या पर्याप्त जल के अभाव में भी यह पौधे अपनी अनुकूलन क्षमता (अडॉप्टेबिलिटी) का बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं,इन परिस्थितियों में ये अपनी पंखुड़ियों को पूरी तरह समेट लेते हैं और परिस्थिति बिगड़ने पर कुछ पत्तियों को झड़ा भी देते हैं । परिस्थितियां अनुकूल होते ही ये नई पत्तियों को उगा कर फिर ताज़ा तरीन और मोहक हो जाते हैं। इन आम फूलों में और भी एक खासियत है कि यह "विन्का एल्कलॉइड" पदार्थ का प्रमुख स्त्रोत हैं जो कि कैंसर के इलाज के लिये इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं बनाने के काम आता है। एलोपैथिक दवाओं के अलावा आयुर्वेद, चीनी और यूनानी चिकित्सा में भी इन फूलों का उपयोग होता है।इसका मतलब यह कतई नहीं हैं की आप सड़क चलते दो तीन फूल मुंह में डाल लें, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञान की तरह यह भीषण गलत हो जाएगा क्योंकि ये फूल इंसानी भोजन नहीं हैं, और बिना डॉक्टर के परामर्श के इनका सेवन न करें।
प्रकृति की अनगिनत सौगातों के बीच सदाबहार को देखकर यह प्रेरणा मिलती है कि असली विशिष्टता (एक्सकलुसिविटी) सादगी में ही है और सरलता भी एक मजबूत, कर्मठ और जीवटता से पूर्ण जीवन का आधार बन सकती है। आशा है की आप 'सादा जीवन उच्च विचार' के आदर्श को अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न करेंगे और आपके आसपास उगे बारामासी के फूल आपको प्रेरणा देते रहेंगे,की अगर खिलें तो बारामासी की तरह। जल्द ही यह पौधा लगाएं और जीवन के अभावों में भी मुस्कुराएं और आनंद लें, स्वस्थ रहें, सचेतन रहें।
संकल्प



बहुत सुंदर। अपने आसपास की सामान्य चीजों को आप जिस विशिष्ट दृष्टि से देखते हैं, उसके बारे में व्यापक अध्ययन के बाद रोचक और सामान्य व सरल भाषा में अभिव्यक्त करते हैं, यह बहुत प्रशंसनीय है। बहुत शुभकामनाएं।💐👌
जवाब देंहटाएं'अगर खिलें तो बारामासी की तरह ' बहुत सुंदर लेख । बधाई आपको 💐
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