मार्च 3 - विश्व वन्यजीव दिवस

 

मार्च 3 - विश्व वन्यजीव दिवस

आज 3 मार्च विश्व वन्यजीव दिवस के रुप में मनाया जाता है। 20 दिसंबर 2013 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में घोषित करने का निर्णय लिया था। इस दिवस को जंगली जीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये मनाया जाता है। इस दिन, 1973 में वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) को अंगीकृत किया गया था। इस कन्वेंशन के नियम 1975 में लागू हुए थे।

इस कन्वेंशन में भारत समेत 182 देश और युरोपियन यूनियन भी शामिल है और इसका मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय प्रजातियों की खरीद फरोख्त को रोकना और इनके व्यापार के अंतरराष्ट्रीय नियम बनाना है। काश ऐसी संस्थाएं मानव सभ्यता की शुरुआत से ही बन गई होतीं, चलिये शुरुआत न सही पर 1975, यानी आद्योगिक क्रांति (1760-1840) के भी लगभग 150 साल बाद ऐसी संस्था बनी। यह हमारी प्राथमिकताओं को दर्शाता है, मानव उस समय अपनी ही रूढ़ियों जैसे उपनिवेशवाद (कॉलोनाइसेशन), नस्लवाद, जातिवाद, लिंगभेद आदि से जूझ रहा था और आज भी इनका असर कहीं संकीर्ण विचारधाराओं के दबे स्वर में तो कहीं राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के मुखर उद्घोष में दिखाई देता है । 

भारत सहित विश्व के कई देशों ने वन्यजीव संरक्षण के लिये कई कदम उठाए हैं, 2016 में जीव वैज्ञानिकों के एक दल ने विश्व के सभी देशों के वन्यजीव संरक्षण कानून और योजनाएँ, वन्यजीवों की वर्तमान स्थिति, जीडीपी का प्रतिशत जो संरक्षण पर व्यय किया गया आदि मानकों के आधार पर सभी देशों को श्रेणीबद्ध किया । यह रिपोर्ट 2017 में प्रकाशित हुई (चित्र देखें - इकोनॉमिस्ट से साभार), शीर्ष दस देशों में 7 अफ्रीकी देश हैं जिसमें बोटसवाना प्रथम है और नामीबिया, तंज़ानिया, ज़ाम्बिया आदि भी हैं।  वैज्ञानिकों के अनुसार विकसित देशों के मुकाबले आर्थिक रूप से कमतर ये देश दुनिया में वन्यजीव संरक्षण का परचम उठाए हुए हैं क्योंकि यहां वन्यजीव संरक्षण को नेचर टूरिज्म के माध्यम से जोड़ दिया गया है। यह काफी दिलचस्प है क्योंकि संरक्षण और मानवों की आजीविका को जोड़ने से वन्यजीवों का हित ही मानवों का हित भी बन गया है।भूटान इस क्रम में एशिया का एकमात्र देश है क्योंकि वहां कानूनन भूभाग का दो तिहाई हिस्सा वनक्षेत्र होना अनिवार्य है जो वन्यजीवों की बेहतर सुरक्षा निर्धारित करता है। नॉर्वे और कनाडा में सख्त वन्यजीव संरक्षण कानून जिनमें जीवों को इंसानों के समान कानूनन अधिकार शामिल हैं और इनके संरक्षण पर किये गए व्यय के आधार पर अग्रिम स्थान मिला है।



बहरहाल ऐसे बहुत से उदाहरण है जहाँ विश्व में वन्यजीवों के संरक्षण की स्थिति बेहतर है और कहीं बहुत ही ख़राब पर निश्चित ही विश्व वन्यजीव दिवस का यह दिन हमें वन्यप्राणियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करता है और चेताता है कि वन्यजीवों का संरक्षण पर्यावरणविदों या सरकारी महकमों की ही ज़िम्मेदारी नहीं है यह जिम्मेदारी है हर उस इंसान की जो इन जीवों से अपनी अगली पीढ़ियों को रूबरू कराना चाहता है । 

संकल्प

टिप्पणियाँ

  1. बढ़िया जानकारी। प्रासंगिक किन्तु हमेशा ध्यान दिए जाने योग्य। बधाई लिखते रहिए। शुभकामनाएं💐👌

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  2. Nice article Sankalp - good information. Ultimately it boils down to individuals to become more passionate about nature and feel more responsible. Governments have a part to play but individuals have to take responsibility of conservation.

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