विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2021

 विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2021

आज यानि 5 जून 2021 को विश्व पर्यावरण दिवस है। हर साल यह दिन पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये मनाया जाता है।

बच्चों में जागरूकता फैलाने के लिये इस दिन कई कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं होती हैं, विशेषकर चित्रकला प्रतियोगिता। इसमें बच्चे इंद्रधनुषी रंगों से अपना पर्यावरण प्रेम और जागरूकता फैलाने के संदेश लिखते हैं। मुझे भी अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। पर्यावरण पर चित्र बनाने का विचार आते ही, सबसे पहले समुद्र, नदी, तालाब, जंगल, पेड़, पशु-पक्षी आदि के चित्र मानस पटल पर उभर आते और फिर कागज़ पर उनकी छवि स्वतः बन जाती। आपने भी ऐसे चित्र ज़रूर बनाए होंगे।

अब विचार करने पर लगता है कि इन छवियों में पर्यावरण का एक और अभिन्न अंग क्यूँ ध्यान में नहीं आता। एक ऐसा प्राणी जिसकी पर्यावरण पर सबसे गहरी छाप है। ये कोई और नहीं इंसान हैं माने हम और आप।आज पेड़-पौधे,पशु-पक्षियों, धरती,पहाड़, जंगलों के साथ इंसानों का भी दिन है।

 वो कहते हैं न कि मछली को तब तक पानी का महत्व नहीं पता चलता जब तक उसे पानी से बाहर न निकाला जाए। उसी तरह हम मनुष्य भी पर्यावरण को एक पृथक इकाई मानते हैं जबकि हम उसी में समाहित हैं। आज जिस गति से हम पर्यावरण का दोहन कर रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब हमें भी मछली की तरह हमारे पर्यावरण से बिछुड़ना पड़ेगा। शायद वह पृथ्वी पर मानव सभ्यता का आखिरी दिन होगा और हम में से शेष कुछ लोग नोहा की तरह नई धरती तलाशने निकल पड़ेंगे।

आज सहारा के रेगिस्तान में असमय बारिश होने से पनपे टिड्डी दल भारत में कहर बरपाते हैं, तो अमेज़ॉन के जंगलों की कटाई से बढ़ी ग्रीन हाऊस गैसों और उनके कारण बढ़ते तापमान से हिमखंडों के पिघलने से दक्षिण एशियाई देशों में भयंकर चक्रवात आते हैं। ऐसे कई संकेत हमें लगातार मिल रहे हैं और इनकी भयावहता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आज से डेढ़ साल पहले किसने सोचा होगा कि घर से बाहर निकलना भी दुर्भर होगा। इसी तरह यह भी हो सकता है कि साफ जल और वायु के लिए भी इंसान त्राहिमाम करने लगे। एक ऐसा जीवाणु हवा और जल में घुल जाए जिसे हमारे एयर और वाटर प्यूरीफायर न मार सकें, जो कि किसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला में हो रहे "प्रयोग" का नतीजा हो?

क्या कीजियेगा फिर अपने बनाए साजो सामान का? न कोई यंत्र काम का होगा न तंत्र। ज़रूरत होगी तो बस थोड़ी साफ हवा, जल और जीवित रहने जितने भोजन की। शायद यह सब न हो और हम ऐसे ही अपना जीवन जी लें पर आने वाली पीढ़ियों का क्या?

हम सभी को सामाजिक तौर पर पर्यावरण के प्रति अपनी जवाबदारी निभानी होगी और अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी। आज सामाजिक और वाणिज्यिक रूप से पूरा तंत्र पर्यावरण को नष्ट करने के आधार पर बना है। इस तंत्र को तोड़ना और पर्यावरण से जोड़ना होगा।मसलन शहर में एक शौपिंग मॉल बनाने की जगह एक जंगल उगाना होगा। मॉल प्रबंधक की जगह वन प्रबंधक की, शॉप इंचार्ज या उसमें काम करने वाले कारिंदों की जगह ट्री (वन) इंचार्ज और वन मित्रों की नौकरियां निकालनी होंगी। ये जंगल निजी या सरकारी तौर पर बनाए जा सकते हैं या दोनों की प्रतिभागिता से । अगर ऑक्सीजन और पानी को प्राथमिकता दी गई तो जंगल उगाने वाली कंपनी के शेयर सबसे महंगे बिकेंगे। इन कम्पनियों में काम करने वालों को पेड़ों और जीवों के बेहतर संरक्षण के लिए पुरस्कार और अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। ऐसी कंपनियों में नौकरी करने के आवेदन करने वालों की होड़ लग जाएगी, आखिर पैसा और साथ ही स्वच्छ वातावरण कहाँ मिलता है। इसी तरह जल, पहाड़ और वायु संरक्षकों की फौज तैयार हो जाएगी।

यह सब शायद तभी संभव है जब हम सभी नींद से जागें और अपनी साँसों को अपनी प्राथमिकता बनाएं। या फिर यह सब करने का मौका ही नसीब न हो और धरती से हम इंसानों का वजूद खत्म हो जाए, एक ऐसा सड़न फैलाता नासूर जिसे काट कर फेंक दिया गया हो। ज़रा सोचियेगा और हाँ पर्यावरण दिवस की आप सभी को बहुत बधाई ।

संकल्प




टिप्पणियाँ

  1. वाह! प्रासंगिक आलेख। पर्यावरण में मनुष्य भी शामिल है सच कहा,यह बात अक्सर भुला दी जाती है। मॉल की तरह एक जंगल शहर में लगाने का प्लान बनाना चाहिए। कुछ ऐसी पहल इंदौर में कभी 'स्मृति मार्ग' और 'पितृ पर्वत' के रूप में हुई भी थी किन्तु इसे योजनाबद्ध रूप से हर शहर,महानगर में अपनाया जाना चाहिए। बहुत बधाई आपको।💐

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    1. निरंतर प्रोत्साहन और ऐसे प्रयासों की जानकारी साझा करने के लिए बहुत शुक्रिया पापा 💐💐।

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  2. Sahi hai.. thoughtfull with achievable suggestion to bring back healthy environment.

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  3. Bahut sundar lekh - lekin dukh yeh hai ki bahut kam log aap jaisa soch rahe hain.

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