टेरेस को जीवंत करना आसान है बशर्त?

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टेरेस को जीवंत करना आसान है बशर्त?


टेरेस, बालकॉनी या छत हमारे घर का एक ऐसा कोना, जो हमें प्रकृति से जोड़े रखता है। गर्मियों में चलती ठंडी बयार से लेकर सर्दियों की गुनगुनी धूप तक, मौसम के हर मिज़ाज़ को हम इस कोने से और बेहतर महसूस कर पाते हैं, और अगर यहां पौधे भी हों तो यह कोना प्रकृति की सुंदर आभा से भर उठता है। ये पौधे हमें जीवंत होने का और एक छोटे से प्रतिरूप में ही सही प्राकृतिक परिवेश में होने का अहसास दिलाते हैं। पेड़ पौधों के साथ हर प्राकृतिक परिवेश का अभिन्न अंग होते हैं वहां विचरते जीव जंतु और यदि आप सचमुच अपने टेरेस या छत को प्राकृतिक रूप में देखना या विकसित करना चाहते हैं तो वहां परिंदों को ज़रूर आमंत्रित करें।


सच मानिए, आपकी सुबह और भी उजली हो जाएगी जब आप अपने खुशनुमा और हरीतिमा बिखेरते पौधों के साथ पानी के सकोरे में मैना को छपछपाते, अठखेलियाँ करता देखेंगे। दोपहर में आपके ही आस पड़ोस के नाना प्रकार के पंछी जैसे गोरैया, कबूतर, मैना, बुलबुल, कौआ आदि अपनी बारी का इंतज़ार करते एक-एक करके पानी पीता दिखेंगे। थोड़ा सा पानी बांट कर आप अपने कुटुंब को कुछ और बड़ा कर सकते हैं और इन सुंदर जीवों को बहुत करीब से देख सकते हैं।


अगर आप चाहें तो पानी रखने के साथ साथ कुछ गमलों में बाजरी या जवारी बो दें, यकीनन टेरेस या बालकनी में बोई थोड़ी सी बाजरी से आप रोटी नहीं बना पाएंगे,पर इन पौधों में बालियां आते ही आप अनाज के शौकीन पंछियों जैसे गौरैया और तैलीय मुनिया को अपना मेहमान बनता पाएंगे। जब ये पक्षी बाजरे की बाली पर झूलकर दानों का सेवन करेंगे तब इन्हें देखकर आप अलौकिक आनंद का अनुभव करेंगे, मानों आपकी छत गिर या कान्हा अभ्यारण्य हो और आप वहाँ इन परिंदों को अपने प्राकृतिक रूप में उड़ता और भोजन करता देख रहे हों।


जलपान के प्रबंध के साथ अगर संभव हो तो एक-दो छोटे चिड़िया-घर भी अपनी बालकॉनी या छत पर लटका सकते हैं और अपने प्राकृतिक कोने को गोरैयाओं के परिवार के साथ साझा कर सकते हैं।


यह बात गौर करने लायक है कि जहाँ आज हमारे घर हैं वहाँ कभी पहाड़, वन या उपवन रहे होंगे, वहाँ खड़े विशाल दरख्तों पर पशु पक्षियों की कई पुश्तें वर्षों से रहती आई होंगी, इस तरह सोचें तो इन पक्षियों के साथ थोड़ा सा दाना और पानी साझा कर हम कोई बड़ा काम नहीं कर रहे हैं, हम प्रायश्चित कर रहे हैं उनके घरों पर अतिक्रमण करने का और साथ ही सम्पूर्ण मानव सभ्यता को विध्वंस से भी बचा रहे हैं क्यूंकि पर्यावरण का संतुलन इंसान के साथ इन परिंदों पर भी टिका हुआ है। अब अपनी बालकॉनी या टेरेस को और जीवंत और सार्थक बनाना आसान है बशर्त आप अपना हृदय बड़ा रखें और प्रकृति के सभी जीवों को अपने कुटुम्ब में स्थान दें।


संकल्प बक्षी


(छत पर पक्षियों से संबंधित स्वयं द्वारा लिये कुछ चित्र संलग्न हैं।)





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