बारिश - सचेतन आँखों से
बारिश - सचेतन आँखों से
बरसात की घटा सब तरफ छाई हुई है । प्रकृति अपने सृजनात्मक चरम पर है । इन दिनों ज़्यादातर वन्यजीव अभ्यारण्य तीन से चार महीनों के लिये बंद हो जाते हैं, वहाँ इंसानी हस्तक्षेप और भ्रमण कम से कम रखा जाता है । इससे वन्यजीवों के प्रजनन और सँख्या में बढ़ोतरी में सहायता मिलती है । वन्यजीव अभ्यारण्य से दूर और इंसानी बस्तियों के करीब भी प्रकृति के कुछ ऐसे रंग देखने को मिलते हैं कि वे हैरत और रोमांच पैदा करते हैं बशर्त है देखने वाली नज़र हो ।
जून और जुलाई के दौरान मेघ मल्हार का सबसे अधिक देखा या पहचाने जाने वाला पक्षी भारतीय कोयल है । मई के अंत से ही कुहू कुहू की पुकार के साथ काला-बैंगनी रंग वाला नर - चितकबरी और कुछ भूरे काले रंग की मादा को रिझाने का प्रयास करता दिखता है । नर की आवाज़ की तरफ अगर आप ध्यान से देखेंगे तो हो सकता है इन्हें 70 से 90 के दशक के फिल्मी हीरो हीरोइन की तरह एक दूसरे के पीछे भागता, रूठता और मनाता हुआ पाएंगे । कोयल के अलावा इंसानी बस्तियों के आसपास मिलने वाले और भी कई पक्षी जैसे सूर्य पक्षी (सन बर्ड), फुतकी (ऐशी प्रिनिया) और बगुले (केटल इग्रेट) आदि इस मौसम में प्रजनन करते हैं । आप गौर से अपने आस पास के पेड़ों और बगीचों को देखें तो ज़रूर इनकी झलक देख पाएंगे ।
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| नर और मादा कोयल |
| बगुला |
बरसात का मौसम कीट जगत में भी कई बदलाव लेकर आता है । इस मौसम में आप उड़ते हुए चीटों को देखेंगे, इनमें से ज़्यादातर नर और कुछ मादा रानी चीटियाँ होती हैं । नरों का पंखदार जीवन बस एक या दो ही दिन का होता है । इन उड़ती चीटियों की दावत उड़ाने का कई पक्षी तत्परता से इंतज़ार करते हैं जैसे सात भाई (जंगल बैबलर), गौरैया, मैना आदि । सात भाई या बैबलर अक्सर 6-7 या अधिक के झुंड में रहते हैं । इनकी धमा चौकड़ी आपकी दिन की नींद में खलल ज़रूर पैदा कर सकती है । नींद में खलल की बात हो और पपीहे की बात न हो तो वह बात अधूरी है । पपीहे या हॉक कुकू बारिश के मौसम में लगातार बोलते हैं जैसे बारिश को बुला रहे हों । इनकी पीहू पीहू के स्वर निम्न तारत्व (लो पिच) से उच्च तारत्व (हाई पिच) से चीखने तक चले जाते हैं , इसलिए अंग्रेज़ी में इन्हें ब्रेन फीवर पक्षी भी कहा जाता है । पर इसके सुर तान का बुरा न मानियेगा, बेचारा पपीहा सिर्फ अपनी प्रेयसी को रिझाने का जतन कर रहा होता है ।
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| पर वाली चीटियों का भोजन करते बैबलर या सात भाई |
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| बैबलर |
बारिश में मेंढक भी खूब पनपते हैं तो उन्हें खाने वाले सर्प और कुछ पक्षी जैसे किंगफिशर भी बारिश में आसानी से देखे जा सकते हैं । किंगफिशर नीले रंग और सफेद गले वाला एक सुंदर पक्षी है। सर्पों को देखकर घबराइयेगा मत, वे अपने बिलों में पानी भरने के कारण दूसरा आशियाना ढूंढने निकल पड़ते हैं । ज़्यादातर सर्प विषहीन होते हैं और जब तक उन्हें नुकसान न पंहुचाया जाए, वे इंसानों से दूरी बनाए रखने का प्रयास करते हैं ।
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| महोक |
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| किंगफिशर |
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| गुलदुम बुलबुल |
इन सब के अलावा भी आप कई पक्षियों और कीटों को पड़ती बारिश में अपना भोजन ढूंढते देखेंगे । अपने आसपास की दुनिया को सचेतन आखों से देखें, बारिश के कई नए रंग आपके मन को सराबोर ज़रूर करेंगे ।
संकल्प बक्षी







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