प्रवासी पक्षी - 1: प्रवास क्यों?

 प्रवासी पक्षी -  1: प्रवास क्यों?

फ़र्ज़ कीजिये कि आप उत्तरी यूरोप, रूस, मंगोलिया या उत्तरी ध्रुव के करीब किसी जंगली इलाके में रहते हैं । सितंबर का महीना है और कड़ाके की ठंड पड़ने वाली है ।आप इस इलाके के बाशिंदे हैं और जानते हैं कि ठंड में पारा गिरते ही वनस्पतियों से लेकर जल तक सब कुछ बर्फ़ से ढ़क चुका होगा । आपके पास ऐसे साधन नहीं हैं कि आप उस ठंड में जीवित बच पाएंगे । ऐसे हालातों में जीवित रहने के लिए आप क्या करेंगे ?

निश्चित रूप से ठंड पड़ने से पहले ही आप किसी गर्म जगह तक पंहुचने का जतन करेंगे, ऐसी जगह जहाँ भोजन, जल और सुरक्षा हो । इस खयाली कहानी में आप एक पक्षी, पशु, या मछली जैसे जलचर कोई भी हो सकते हैं,आप शहरों की खाक छानने वाले गांव से आए मेहनतकश इंसान हो सकते हैं जो रोजी कमाने शहर आया है क्योंकि गाँव में मुफ़लिसी की ठंड पसरी पड़ी है ।

प्रकृति का दस्तूर है कि हर जीव अपनी सुरक्षा के लिए प्रवास पर निकलता है, सफर की कठिनाइयों से जूझता हुआ अपनी मंज़िल की तरफ । अक्टूबर की शुरुआत से मार्च तक उत्तरी ध्रुव से सटे ठंडे इलाकों के कई पक्षी भूमध्य रेखा के नज़दीक के गर्म स्थानों पर प्रवास के लिए जाते हैं ।

पक्षियों का प्रवास यानी सर्दियों में गर्म स्थानों पर रहकर जीवित रहने की जुगत । हालांकि हर पक्षी प्रवास पर नहीं निकलता है, यह अनुवांशिक प्रवत्ति होती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी हो रहे क्रमागत उन्नति या एवोल्यूशन से उत्पन्न होती है । हर पक्षी प्रजाति की अपनी पसंदीदा जगह होती है जहाँ वे प्रवास पर पंहुचने के लिए उड़ जाते हैं । ये जगह इन पक्षियों के स्थाई रहवास से हज़ारों मील दूर या कुछ सौ मील दूर भी हो सकती है । 

जहाँ साइबेरियाई क्रेन पक्षी उत्तरी मंगोलिया से मध्य और पश्चिमी भारत तक सफर करते हैं वहीं अल्टरामरीन फ्लाईकैचर जो कि हिमालय की तलहटी में रहने वाली छोटी सी चिड़िया है मध्य और दक्षिण भारत के इलाकों तक सफर कर प्रवास करने पंहुचती है । अब तक बिना रुके सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड एक युवा बार टेल्ड गोडविट (एक बतख जैसे पक्षी) के नाम दर्ज है जिसने अमेरिका के अलास्का से ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया तक का लगभग 13,560 किमी का सफर तय किया । उल्लेखित तीनों पक्षियों के संलग्न चित्र देखें, छोटे से फ्लाईकैचर से लेकर बड़े क्रेन तक हर प्रकार के पक्षी प्रवास पर निकलते हैं । 

ये मीलों सफर तय करते हैं सिर्फ अपनी स्वाभाविक प्रवत्ति या इंस्टिंक्टस के बल पर । इन्हें वंशानुगत ही अपने सफर की दिशा और बीच में आने वाले पड़ावों का ज्ञान होता है, और शायद नवजात और कम उम्र के पक्षी वयस्क पक्षियों से प्रवास के सूत्र सीखते हैं । पक्षियों के इस सफर पर कई शोध हुए हैं और अब भी इसकी गुत्थियां इंसानी समझ से परे है ।

इस सफर के बारे में और जानेंगे इस श्रृंखला की अगली कड़ी में, तब तक अपने नजदीकी तालाब, जंगल या हरियाली की ओर हो आएँ, हो सकता है प्रवास पर आए हुए कुछ अतिथियों से आपकी भेंट हो जाए ।

(चित्र विकिपीडिया से साभार)

संकल्प बक्षी



 


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