प्रवासी पक्षी -3 चक्रवाक की कहानी और प्रवासी पक्षियों के सफर पूर्ण कर पाने की अनिश्चितता

 प्रवासी पक्षी -3 चक्रवाक की कहानी और प्रवासी पक्षियों के सफर पूर्ण कर पाने की अनिश्चितता

प्रवासी पक्षी कई वर्षों से भारतीय उपमहाद्वीप पर आते रहे हैं । इनमें से कई सारी सर्दियाँ यहीं बिताते हैं तो कई कुछ दिन ठहर कर आगे अफ्रीका या ऑस्ट्रेलियाई द्वीप समूह तक कि यात्रा करते हैं । इनमें से कई पक्षी भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुके हैं ।

ऐसा ही पक्षी हैं "रडी शेल डक" जो कि एक प्रकार की बतख है । इन्हें हिंदी में चकवा, चक्रवाक या ब्रह्माणी बतख भी कहा जाता है । हर वर्ष इन पक्षियों के झुंड यूरोप और उत्तरीय एशिया के ठंडे इलाकों से सर्दियों में भारत प्रवास पर आते रहे हैं । ये पक्षी गाढ़े नारंगी या कत्थई रंग के होते हैं और इनका गर्दन और सर बादामी रंग का होता है । नर के गले पर काले रंग का पट्टा होता है । ये पक्षी आजीवन जोड़ा बनाते हैं और सदैव एक दूसरे के साथ रहते हैं। इनका ज़िक्र वेदों में दंपत्ति के आपसी प्रेम और समर्पण के रूप में किया गया है ।

चक्रवाक जोड़ा (चित्र विकिपीडिया से साभार)


 ये पक्षी रात को सक्रिय रहते हैं और कई बार एक साथ तेज़ कर्कश ध्वनि में बोलते हैं। भारतीय किंवदंतियों में इसे नर पक्षी या चकवे की मादा से बिछड़ने की वेदना के स्वर के रूप में देखा गया है । कालीदास सहित कई कवियों ने प्रेम और विरह के उदाहरणों में रडी शेल डक या चक्रवाक का उल्लेख किया है । दरअसल ये पक्षी तालाबों, सरोवरों और अन्य जलाशयों में बड़ी तादाद में सर्दियां बिताने आते हैं और रात घास, पौधे, दाने और पानी में मिलने वाले छोटे जीवों को खाने और आनंद करने में व्यतीत करते हैं । गर्मियों का आगाज़ होते ही ये यूरोप और एशिया में अपने प्रजनन क्षेत्रों की ओर उड़ जाते हैं ।

पक्षी स्थानीय हों या प्रवासी इनका जीवन इंसानों से विपरीत काफी सहज है । एक ऐसा जीवन जो निश्चित ही हर कदम पर कंटकों से भरा है पर द्वेष, सामाजिक भेदभाव, असमानता और अनैतिकता से कोसों दूर है ।

 जहाँ कुछ दूर चलने के लिए ही हम अपना झोला तैयार रखते हैं ये पक्षी सैंकड़ों मील लंबा सफर बिना किसी साजो सामान के तय करने निकल पड़ते हैं । अमेरिका के कॉर्नेल विश्विद्यालय के वैज्ञानिकों ने 2013 से 2017 के बीच कैनेडा से अमेरिका के दक्षिणी इलाकों में प्रवास पर आने वाले और फिर लौटने वाले पक्षियों की गिनती करने का निश्चिय किया । इसके लिए 143 रेडार स्टेशनों से डाटा इकट्ठा किया गया । डाटा से जुटाए गए तथ्य चौंकाने वाले रहे, कनाडा से अमरीका आने वाले पक्षियों में से लगभग 64% ही वापस लौट पाए , यानी 10 में से चार पक्षी प्रवास के दौरान या सफर में ही मृत्यु को प्राप्त हो गए । 

इससे और लंबी दूरी तय करने वाले पक्षियों की मृत्यु दर और भी ज़्यादा होने की संभावना है । इनकी मृत्यु के प्रमुख कारण इंसानी गतिविधियों से ही उपजे हैं । इन कारणों के और इनके निदान के बारे में और समझेंगे इस श्रृंखला की अगली कड़ी में ।

क्रमशः।

संकल्प बक्षी

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